
नवविध भक्तिकाओं की संत रचनाओं का अद्भुत अनुभव
विदुषी नंदिनी राव और उस्ताद रईस बाले खान का मंत्रमुग्ध सादरीकरण
पुणे, भक्तिभाव की नवीं अवस्थाओं – श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन – का जीवंत अनुभव रसिकों ने किया। विदुषी नंदिनी राव गुजर और उस्ताद रईस बाले खान ने अपनी गायकी और वादन से इस भक्तिरसपूर्ण संगीतमय मैफल को रोमांचक बनाया।
यह अवसर कन्नड़ संघ, पुणे और कावेरी कलाक्षेत्र द्वारा आयोजित ‘भावसंगीत – भक्तीलहरी’ विशेष सांगीतिक मैफल का था। संत साहित्य के वरिष्ठ विद्वान प्रो. गुरुराज कुलकर्णी ने संतरचनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।
एरंडवणे स्थित कलमाडी हाईस्कूल के शकुंतला शेट्टी सभागृह में आयोजित इस मैफल में मराठी, हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, गुजराती, बंगाली, पंजाबी जैसी कई भाषाओं में रचनाओं का सादरीकरण हुआ। संत ज्ञानेश्वर, संत एकनाथ, संत कबीर, संत मीरा, तुलसीदास और अन्य संतों की रचनाओं के माध्यम से कलाकारों ने भक्त और ईश्वर के विविध संबंधों की झलक पेश की।
नंदिनी राव ने कन्नड़, तमिल और तेलुगु रचनाओं को जीवंत किया, जबकि उस्ताद रईस बाले खान ने मराठी, हिंदी और गुजराती रचनाओं का सादरीकरण किया। चुनिंदा रचनाओं पर नृत्य कलाकारों ने भाव और रस को और प्रभावी बनाया। साथ में यशवंत (मृदंगम्), अजय चंद्रमौळी (वायलिन), अर्ष शहा (गिटार), हेमंत जोशी (तबला), ओजस रानडे (हार्मोनियम), संतोष नाईक (बांसुरी) और अन्य कलाकारों ने सुमधुर साथ दिया।
संतों द्वारा वर्णित नवविध भक्तिपथ और सामान्य भक्तों के लिए सगुण ईश्वर के माध्यम से निर्गुण निराकार की प्राप्ति के मार्ग का प्रो. गुरुराज कुलकर्णी ने विस्तार से विवेचन किया।
कन्नड़ संघ की सचिव मालती कलमाडी ने कहा, “यह केवल प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि भक्तिचलन का अनुभव था, जो भाषाई और प्रादेशिक सीमाओं को पार करता है। गायन, वादन, नृत्य और काव्य के माध्यम से संतों ने अपनी सांस्कृतिक विविधता का वैभव आम जनता के सामने प्रस्तुत किया।”
राधिका शर्मा ने कलाकारों का परिचय कराया और प्राचार्य ज्योती कडकोळ ने आभार व्यक्त किया।



