सीतामढ़ी

महात्मा गांधी की 156वीं जयंती पर जिलाधिकारी ने किया माल्यार्पण, दिया सत्य-अहिंसा का संदेश

महात्मा गांधी की 156वीं जयंती पर जिलाधिकारी ने किया माल्यार्पण, दिया सत्य-अहिंसा का संदेश

 

सीतामढ़ी, विशाल समाचार 

महात्मा गांधी की 156वीं जयंती के अवसर पर आज जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों में गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा भारत की आजादी में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया गया।

 

जिला मुख्यालय सीतामढ़ी के गांधी चौक पर जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय ने गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें शत-शत नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत को आजादी दिलाने में महात्मा गांधी की सराहनीय भूमिका रही है। उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांत ने जन-जन में अद्भुत क्रांति ला दी। गांधी जी हमेशा कहा करते थे कि किसी भी विरोध का मार्ग हिंसात्मक नहीं हो सकता। अहिंसा में जो शक्ति है, उसकी जगह हिंसा कभी नहीं ले सकती।

 

जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा और सादगी का संदेश देता है। आज उनकी जयंती पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि उनके आदर्शों और सिद्धांतों को अपने जीवन एवं कार्य में आत्मसात करेंगे। गांधी जी का मार्ग ही समाज और राष्ट्र को सशक्त, समृद्ध और न्यायपूर्ण बनाने की प्रेरणा देता है।

 

इस अवसर पर समाहरणालय स्थित विमर्श हॉल में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां जिलाधिकारी एवं अन्य पदाधिकारियों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (राजस्व) संजीव कुमार, जिला भूअर्जन पदाधिकारी विकास कुमार, नगर आयुक्त, एडीएम विभागीय जांच कुमार धनंजय, एडीएम आपदा प्रबंधन बृजकिशोर पांडेय, सदर एसडीओ आनंद कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

 

जिलाधिकारी ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। गांधी जी का जीवन आत्मनिर्भरता, श्रम की गरिमा, स्वच्छता और ग्रामीण विकास का संदेश देता है। वहीं शास्त्री जी ने देश को एक मजबूत नेतृत्व दिया। उनका दिया नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी प्रेरणा देता है। शास्त्री जी अपनी सादगी और दृढ़ता के लिए जाने जाते थे और उनके विचारों ने देश में क्रांति की एक अलग अलख जगाई थी।

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