इटावा में बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के चलने वाले कम्बाइन हार्वेस्टर होंगे सीज़ — जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
इटावा, (विशाल समाचार):
जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में आज कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन मालिकों एवं लिपिकीय संवर्ग की डीपीसी संबंधी बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने पराली जलाने पर रोक लगाने एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि —
“जनपद में कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के नहीं चलेगा। यदि ऐसी कोई मशीन चलती पाई गई, तो उसे पुलिस विभाग व सचल दस्तों द्वारा पूरे सीजन के लिए सीज़ कर दिया जाएगा।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि 6 इंच से अधिक ऊँचाई पर फसल की कटाई नहीं की जाए, अन्यथा कम्बाइन मशीन को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में उप कृषि निदेशक आर.एन. सिंह ने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 3 किलोग्राम कणिका तत्व, 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 199 किलोग्राम राख तथा 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं।
इनसे वायु की गुणवत्ता घटती है, जिससे आंखों में जलन, त्वचा रोग, हृदय एवं फेफड़ों की बीमारियाँ बढ़ती हैं।
इसके अलावा, पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व जैसे पोटेशियम ऑक्साइड (5.5 किग्रा), सल्फर (1.2 किग्रा), कार्बन (400 किग्रा) सहित अनेक सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
इससे भूमि की उर्वरता, नमी और जैविक पदार्थों में भारी कमी आती है, जिससे मिट्टी अनुपजाऊ हो जाती है।
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे अपनी पराली को न जलाएं, बल्कि निकटवर्ती गौशालाओं में भेजें।
जो किसान दो ट्रॉली पराली गौशाला ले जाएंगे, उन्हें एक ट्रॉली खाद गौशाला से निःशुल्क दी जाएगी।
दंड का प्रावधान
माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की धारा 24 एवं 26 के अंतर्गत पराली जलाने पर निम्नानुसार जुर्माना निर्धारित है—
1 एकड़ तक क्षेत्रफल पर पराली जलाने पर: ₹5,000
1 से 5 एकड़ क्षेत्र तक: ₹10,000
5 एकड़ से अधिक क्षेत्र पर: ₹30,000

