संपादकीय

“पराली रोकना जुर्माना नहीं, समाधान और विकल्प से संभव”

“पराली रोकना जुर्माना नहीं, समाधान और विकल्प से संभव”

जिलाधिकारी की चौपाल और प्रशासनिक पहल सराहनीय, लेकिन छोटे किसानों के लिए व्यवहारिक मशीनरी और सब्सिडी जरूरी

संपादकीय: विशाल समाचार टीम 

इटावा और आसपास के जिलों में धान की पराली जलाने की घटनाएं हर वर्ष वायु प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा बार-बार चौपालों का आयोजन, किसानों को चेतावनी देना और जुर्माने की घोषणा करना आवश्यक कदम हैं। 7 अक्टूबर 2025 को ग्राम पंचायत चौबिया, ब्लॉक बसरेहर में आयोजित फसल अवशेष प्रबंधन चौपाल इसी दिशा की एक पहल थी। जिलाधिकारी महोदय ने किसानों से अपील की कि वे पराली न जलाएँ और सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम जैसी मशीनरी का उपयोग करें।

 

इन प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि प्रशासन सक्रियता दिखा रहा है। उप कृषि निदेशक ने किसानों को जैविक खेती, रबी सीजन के बीज और खाद की जानकारी दी, तथा पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए फार्मर रजिस्ट्री करवाने का महत्व बताया। यह कदम किसानों को जागरूक करने में मददगार है।

 

लेकिन केवल चेतावनी और जुर्माने से समस्या हल नहीं होगी। छोटे और सीमांत किसानों के पास मशीनरी उपलब्ध नहीं होती, और जुर्माना उनकी आजीविका पर भारी पड़ सकता है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को सस्ती, सुलभ और समयबद्ध विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए। सामुदायिक रेंटल मॉडल, मोबाइल-हार्वेस्टिंग सर्विसेज, और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से साझा मशीनरी उपलब्ध कराना आवश्यक है। सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों की सब्सिडी और प्रशिक्षण शिविर भी त्वरित रूप से बढ़ाए जाने चाहिए।

 

साथ ही, जुर्माने की नीति में लचीलापन रखना जरूरी है। छोटे किसानों को चेतावनी और विकल्प दिए बिना दंड देना उचित नहीं। केवल बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन और किसानों के बीच सहयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।

 

पराली जलाने से होने वाले नुकसान और वायु प्रदूषण पर काबू पाना सरकार का कर्तव्य है। परंतु यह तभी टिकाऊ होगा जब केंद्र और राज्य मिलकर छोटे किसानों के लिए तात्कालिक विकल्प उपलब्ध कराएँ— आसान सब्सिडी, सामुदायिक रेंटल मॉडल और प्रशिक्षण — और फिर दंड-प्रणाली को लागू करें। प्रशासन का उद्देश्य जुर्माना थोपना नहीं, बल्कि व्यवहार बदलवाना होना चाहिए। अगर प्रशासन और किसान साथ आएँ, तो यह समस्या जड़ से हल की जा सकती है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button