
तन्वीर नाट्यधर्मी पुरस्कार 2025 तिरुनेलवेली (तमिलनाडु) के दुष्यंत गुणशेखर को प्रदान
तामिळनाडु के स्कूलों में थिएटर को पाठ्यक्रम से जोड़ने वाले अवलिया का सम्मान
विशाल समाचार | पुणे,
भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की भूमि माने जाने वाले तमिलनाडु में स्कूलों के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में थिएटर विषय को सम्मिलित करने का अभिनव प्रयास करने वाले दुष्यंत गुणशेखर को ‘तन्वीर नाट्यधर्मी पुरस्कार 2025’ से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पुणे में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
रुपवेध प्रतिष्ठान और महाराष्ट्र कल्चरल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पुरस्कार समारोह में समकालीन भारतीय रंगभूमि के प्रख्यात दिग्दर्शक, अध्यापक, शोधकर्ता तथा डिजिटल थिएटर के अग्रणी डॉ. अभिलाष पिल्लई के हाथों दुष्यंत गुणशेखर को सम्मानित किया गया।
टिलक रोड स्थित हिराबाग चौक के श्रीराम लागू रंग अवकाश में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र कल्चरल सेंटर के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अभिनेते डॉ. मोहन आगाशे, रुपवेध प्रतिष्ठान के आनंद लागू, महाराष्ट्र कल्चरल सेंटर की व्यवस्थापकीय समिति के अध्यक्ष एस. पी. कुलकर्णी, पुरस्कार विजेता दुष्यंत गुणशेखर तथा प्रसाद वनारसे मंच पर उपस्थित थे।
यह पुरस्कार समारोह का 18वां वर्ष है। रंगभूमि के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले युवा कलाकारों को प्रतिवर्ष इस सम्मान से अलंकृत किया जाता है। पुरस्कार में मानचिह्न तथा 75,000 रुपये की राशि प्रदान की गई।
दुष्यंत गुणशेखर पिछले 13 वर्षों से अपने नाट्यसमूह ‘क्रिया शक्ति’ के माध्यम से समाजिक मुद्दों पर आधारित नाटकों का सशक्त प्रदर्शन करते आ रहे हैं। तमिलनाडु में रंगभूमि संबंधी पाठ्यक्रम विकसित कर निजी एवं सरकारी विद्यालयों के छात्रों में नाट्यकला के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उल्लेखनीय कार्य भी उन्होंने किया है। इसी सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान के लिए उन्हें इस वर्ष का तन्वीर नाट्यधर्मी पुरस्कार प्रदान किया गया।
सम्मान ग्रहण करते हुए गुणशेखर ने कहा,
“पुणे मेरा दूसरा घर है। यहां आकर मुझे हमेशा अपनापन महसूस होता है। श्रीराम लागू रंग अवकाश ने मराठी प्रायोगिक रंगभूमि की अनेक मोहक छवियों का साक्षात्कार कराया है। तन्वीर नाट्यधर्मी पुरस्कार पाकर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूँ।”
उन्होंने आगे बताया कि क्रिया प्ले उपक्रम के माध्यम से स्कूलों में थिएटर ले जाने का प्रयास जारी है। थिएटर बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाता है, विचार क्षमता विकसित करता है और उन्हें सामूहिक कार्य की समझ देता है। इसका परिणाम ‘वर्क स्पेस’ को ‘ह्यूमन स्पेस’ में बदलने में दिखाई देता है।
आज क्रिया शक्ति के माध्यम से 90 से अधिक नाटक मंचित हो चुके हैं, जिनके 1700 से अधिक प्रयोग हुए हैं। इनके माध्यम से 800 कलाकारों को रोजगार तथा 50 कलाकारों को नियमित मानधन प्राप्त हो रहा है। 140 से अधिक स्कूलों में थिएटर आधारित पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है, जिससे अब तक एक लाख से अधिक विद्यार्थियों ने लाभ लिया है।
गुणशेखर ने भारतीय रंगभूमि के भविष्य की बात करते हुए कहा कि विभिन्न प्रादेशिक रंगभूमियाँ—मराठी, बंगाली, गुजराती—अक्सर क्षेत्रीय सीमाओं में बंधी रहती हैं, जबकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। “स्थानीयता की दीवारें तोड़कर आपस में सहयोग बढ़ेगा तभी भारतीय रंगभूमि का भविष्य उज्ज्वल होगा,” ऐसा उन्होंने कहा।
डॉ. अभिलाष पिल्लई ने अपने व्याख्यान में ‘रीइमैजिन द रिंग: द इंडियन सर्कस’ विषय पर जानकारी देते हुए भारतीय सर्कस के इतिहास से लेकर उसके पुनरुत्थान तक के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने एनएसडी और ग्रैंड सर्कस के संयुक्त उपक्रम NOVA के अंतर्गत हुए पंचतंत्र, मेघदूत, समुद्रमंथन जैसे प्रयोगों का उल्लेख किया।
डॉ. मोहन आगाशे ने श्रीराम लागू परिवार द्वारा पुरस्कार परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में सांस्कृतिक विविधता है तथा पुणे में प्रायोगिक रंगभूमि के प्रति युवाओं का बढ़ता आकर्षण उत्साहजनक है। उन्होंने दुष्यंत गुणशेखर के कार्य को “शाश्वत रंगभूमि निर्माण की दिशा में उठाया गया सराहनीय कदम” बताया।
समारोह में आनंद लागू ने पुरस्कार की भूमिका समझाई, प्रसाद वनारसे ने पुरस्कार विजेता का परिचय करवाया तथा कार्यक्रम का संचालन राजेश देशमुख ने किया।


