
स्पेस साइंस इंटरनेशनल सहयोग को बढावा देता
पद्मश्री डॉ. प्रमोद काले के विचार : एमआइटी डब्ल्यूपीयू में
३० वीं फिलॉसफर संतश्री ज्ञानेश्वर-तुकाराम स्मृती व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन
डॉ. प्रमोद काले को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया
पुणे, ‘ स्पेस साइंस इंटरनेशल सहयोग को बढावा देता है, वैसे ही यह देशों के बीच शांतिपूर्ण रिश्ते बनाने में मदद करता है. इंसान जन्म से ही स्पेस को लेकर आकर्षित रहा है. समय के साथ स्पेस का विकास, स्पेस रिसर्च, कम्युनिकेशन, स्पेस में इंसान की मौजूदगी, रिसर्च और स्टडी ये सभी चीजें इंसान की तरक्की और शांति पाने के लिए जरूरी है. इसमें हो रहे बदलाव अब इंसान की नजरों से बच नहीं सकते. यह विचार स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के पूर्व डायरेक्टर पद्मश्री डॉ. प्रमोद काले ने रखे.
एमआइटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, विश्वशांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआइटी, पुणे, भारत और संतश्री ज्ञानेश्वर-संतश्री तुकाराम महाराज स्मृति व्याख्यान श्रृंखला के संयुक्त तत्वावधान में युनेस्को अध्यासन के तहत २४ से ३० नवंबर के दौरान ३०वीं दार्शनिक संतश्री ज्ञानेश्वर तुकाराम स्मृति व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन कोथरूड स्थित एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संतश्री ज्ञानेश्वर सभामंडप में किया गया. इस अवसर पर वे बतौर मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे.
यहां नई दिल्ली से आए आध्यात्मिक वैज्ञानिक डॉ. सी. के. भारद्वाज प्रमुख अतिथि के रुप में थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संस्थापक अध्यक्ष और यूनेस्को अध्यासन के प्रमुख विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने निभाई.
साथ ही डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस, माईर्स के रजिस्ट्रार डॉ. रत्नदीप जोशी और व्याख्यान श्रृंखला के कोऑर्डिनेटर डॉ. मिलिंद पात्रे मौजूद थे.

यह व्याख्यान श्रृंखला माईर्स एमआईटी के मैनेजिंग ट्रस्टी और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन डॉ. राहुल वि. कराड के नेतृत्व में हो रही है.
इस मौके पर पद्मश्री डॉ. प्रमोद काले को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.
पद्मश्री डॉ. प्रमोद काले ने कहा, स्पेस से पृथ्वी को देखते समय, ग्राउंड बेस्ड, एयरबोर्न और सैलेटाइटस के जरिए पृथ्वी पर पानी और वातावरण के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाती है. कुदरती घटनाओं, आपदाओं और इंसानी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. अलग अलग तरह का डेटा इकट्ठा किया जाता हे. स्पेस कम्युनिकेशन में कम्युनिकेशन सैटेलाइटस, ग्राउंड स्टेशन्स और डीप स्पेस नेटवर्क्स जैसे तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. स्पेस में अलग अलग बिंदुओं के बीच का पृथ्वी और स्पेस के बीच जानकारी और डेटा भेजा जाता है. स्पेस का माहौल बिल्कुल अलग है. इसमें हवा नहीं हैे बल्कि यह एक वैक्यूम है, बहूत ज्यादा गर्मी और रेडिएशन जैसे खतरे हैं. यह माहौल ग्रेविटी, रेडिएशन, माइक्रो मीटियोराइट से बना है.
डॉ. सी.के. भारद्वाज ने कहा, अभी पूरी दुनिया में अध्यात्म और शांति की जरूरत है. पढ़ाई में अध्यात्म और विज्ञान की संकल्पना लाना जरूरी हे. यूनिवर्स में मौजूद उर्जा का सही इस्तेमाल इंसानियत और खुद की बेहतरी के लिए किया जाना चाहिए. किसी भी क्रिएटिव क्रिएशन और काम के लिए ऊर्जा बहुत जरूरी हे. शरीर, मन और आत्मा सभी एक दूसरे से जुड़े हुए है.
प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, रामेश्वर में बने मशहूर मानवता तीर्थ भवन से दुनिया को शांति और कल्याण का संदेश दिया जा रहा है. आज यह व्याख्यान श्रृंखला शुरू की गई है, जिसका मुख्य मकसद संत ज्ञानेश्वर और जगद्गुरू संत तुकाराम महाराज का संदेश सारी दुनिया के मानव तक पहुंचाना है. यहां गुणों की पूजा ही भगवान की सच्ची पूजा है. मन और आत्मा का ज्यादा ध्यान करना चाहिए. इसी तरह इंसान को जिंदगी का मकसद और फर्ज पता चलता है.

डॉ. आर.एम.चिटणीस ने स्वागत पर भाषण दिया.प्रो.डॉ. मिलिंद पात्रे ने व्याख्यान श्रृंखला की जानकारी दी. सूत्रसंचालन डॉ. गौतम बापट और आभार डॉ. रत्नदीप जोशी ने किया.

