
सूर्यदत्त संस्थान को ‘महात्मा जोतीबा फुले राष्ट्रीय आदर्श शिक्षण संस्था’ पुरस्कार
प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया के हाथों 129वें अखिल भारतीय महात्मा जोतीबा फुले प्रबोधन मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन
समग्र शिक्षा और संस्कारयुक्त उपक्रम ही मोबाइल का असली ‘एंटी-वायरस’
प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया का मत; सूर्यदत्त संस्थान को मिला ‘महात्मा जोतीबा फुले राष्ट्रीय आदर्श शिक्षण संस्था’ सम्मान
——————————————————
मोबाइल से दूरी रखते हुए छात्र निरंतर कौशल,
बुद्धि और कला विकसित करें : प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया
वानवड़ी में आयोजित 129वें अखिल भारतीय महात्मा जोतीबा फुले प्रबोधन मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन
पुणे: “समग्र शिक्षा और संस्कारक्षम उपक्रम ही वास्तव में मोबाइल का असली ‘एंटी-वायरस’ हैं। मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक कामों के लिए करते हुए छात्रों को अपनी कौशल क्षमता, बुद्धि और कलागुणों को निखारने पर जोर देना चाहिए। महात्मा जोतीबा फुले द्वारा दिए गए प्रबोधनपर विचारों को अपनाकर उन पर चलना ही समाज की उन्नति का मार्ग है,” यह विचार सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि ‘सूर्यदत्त’ संस्थान की स्थापना से लेकर आज तक महात्मा फुले के प्रबोधन के मार्गदर्शन में संस्था निस्वार्थ भाव से छात्रों को शिक्षित कर रही है और समाजहित के मजबूत, सक्षम नागरिक गढ़ने का कार्य कर रही है।
वानवड़ी स्थित महात्मा फुले सांस्कृतिक सभागृह में आयोजित 129वें अखिल भारतीय महात्मा फुले प्रबोधन मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन प्रा. डॉ. चोरडिया के हाथों हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता अखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद गोरे ने की। राज्यभर से साहित्यकार, कवि, शोधकर्ता, कलाकार और साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूट्स को ‘महात्मा जोतीबा फुले राष्ट्रीय आदर्श शिक्षण संस्था’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान डॉ. चोरडिया ने महाराष्ट्र के साहित्यिक प्रतिनिधियों और अखिल भारतीय मराठी साहित्य परिषद की उपस्थिती में स्वीकार किया।
सामाजिक उत्तरदायित्व, नवोन्मेषी शैक्षणिक उपक्रम, मूल्याधारित शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण की दृष्टि से किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों को ध्यान में रखते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया। मान्यवरों ने कहा कि ‘उद्धरेदात्मनाऽत्मानम्…’ के जीवनमंत्र से प्रेरित होकर सूर्यदत्त संस्थान छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम कर रहा है।
प्रा. डॉ. चोरडिया ने कहा, “मराठी साहित्य महाराष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा का संवाहक है। इस परंपरा का संरक्षण और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। महात्मा फुले के प्रबोधनपर विचारों की याद दिलाने वाले इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का हिस्सा बनना सम्मान की बात है।”
उन्होंने बताया कि सूर्यदत्त संस्थान में छात्रों के लिए साहित्यिक और बौद्धिक संमेलन आयोजित किए जाते हैं। ऐसे उपक्रमों से हमें छात्रों की नई प्रवृत्तियाँ, दिशा और क्षमताएँ समझने में मदद मिलती है। अब तक 1,27,000 से अधिक छात्र सूर्यदत्त से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 6,000 से अधिक छात्र आज विदेशों में प्रतिष्ठित कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं.”
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध कलाकार किशोर टिळेकर उपस्थित थे। डॉ. शरद गोरे ने महात्मा फुले के प्रबोधनपर और प्रभावी विचारों का सशक्त विवेचन किया। नंदकिशोर राउत द्वारा पत्नी की शिक्षा पूर्ण कराकर उन्हें सरकारी उच्च पद तक पहुंचाने की प्रेरक कथा भी मंच से साझा की गई। सम्मेलन के सफल आयोजन में सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम का समन्वयन सूर्यदत्त संस्थान की पीआर संचालिका स्वप्नाली कोगजे ने किया।

