पूणे

संविधान की मूल्य–परंपरा एवं फुले दंपत्ति के विचार प्रगल्भ समाज के लिए अनिवार्य : डॉ. अश्विनी धोंगडे

संविधान की मूल्य–परंपरा एवं फुले दंपत्ति के विचार प्रगल्भ समाज के लिए अनिवार्य : डॉ. अश्विनी धोंगडे

 

संविधान दिवस पर आयोजित ‘हम सावित्री की मायलेकी’ काव्य–संमेलन का समापन

 

पुणे। संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हम सावित्री की मायलेकी’ महाकाव्य संमेलन में जेष्ठ साहित्यकार डॉ. अश्विनी धोंगडे ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का शिक्षण, साहित्य तथा महिला सशक्तिकरण में योगदान अमूल्य है। सावित्रीबाई और महात्मा जोतिबा फुले के विचार तथा संविधान के मूल मूल्य—स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुता—आज प्रगल्भ समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वबंधुता मूल्यसंवर्धन समिति, काषाय प्रकाशन तथा बंधुता प्रकाशन द्वारा किया गया। नवी पेठ स्थित एस. एम. जोशी सभागृह में हुए समापन समारोह की अध्यक्षता संगीता झिंजुरके ने की। स्वागताध्यक्ष सीमा गांधी, संयोजिका प्रा. भारती जाधव, पौर्णिमा वानखेडे, प्रा. सायली गोसावी सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे।

सम्मान समारोह

संमेलन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

‘क्रांतिसूर्य सावित्रीज्योति पुरस्कार’ : बंधुता आंदोलन में पाँच दशकों से अधिक समय तक सक्रिय योगदान देने वाले एक दंपत्ति को प्रदान

‘ज्ञानज्योति सावित्रीबाई फुले ज्ञानसाधना पुरस्कार’ : एक प्रमुख कन्या महाविद्यालय को प्रदान

‘संविधान सम्मान आदर्श पत्रकारिता पुरस्कार’ : प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनेक पत्रकारों को प्रदान

‘क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले आदर्श शिक्षिका पुरस्कार’ : विभिन्न महाविद्यालयों की अनेक शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के प्रमुख विचार

डॉ. अश्विनी धोंगडे ने कहा कि फुले दंपत्ति ने समाज–परिवर्तन के लिए साहित्य को साधन बनाया। ‘सार्वजनिक सत्यधर्म’ में वर्णित मूल्य आज भी संविधान की आत्मा से मेल खाते हैं।

इस अवसर पर एक वक्ता ने पुणे शहर का नाम ‘क्रांतीज्योति सावित्रीबाई फुले नगर’ करने का प्रस्ताव भी रखा।

 

संगीता झिंजुरके ने कहा कि बंधुत्व के सिद्धांत समाज में शांति और सद्भावना स्थापित करने के लिए अनिवार्य हैं। सम्मानित व्यक्तियों के कार्य समाज को दिशा देने वाले हैं।

 

स्वागत भाषण सीमा गांधी ने दिया। प्रास्ताविक प्रा. भारती जाधव ने प्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम के अंत में प्रा. सायली गोसावी ने आभार व्यक्त किया।

समापन प्रा. शंकर आथरे द्वारा रचित एवं प्रस्तुत ‘संविधान गीत’ के सामूहिक गायन से हुआ।

दोपहर सत्र में वरिष्ठ कवयित्री प्रिया माळी की अध्यक्षता में ‘सावित्री की काव्यफुले’ काव्य–संमेलन हुआ, जिसमें तीस से अधिक कवयित्रियों ने सहभाग दर्ज किया।

 

 

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