संपादकीय

200 करोड़ का नया भाजपा कार्यालय… जनता पूछ रही है—यह धन आया कहाँ से?

200 करोड़ का नया भाजपा कार्यालय… जनता पूछ रही है—यह धन आया कहाँ से?

 

लखनऊ में भाजपा का नया प्रदेश कार्यालय बनने की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। जियामऊ में जमीन खरीदी जा चुकी है और 58 हजार वर्ग फुट में तैयार होने वाले इस भवन पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। डिजिटल वॉर रूम, आईटी सेल, कॉल सेंटर और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था वाले इस हाईटेक परिसर का नक्शा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को देखा और निर्माण जल्द शुरू करने के निर्देश दिए।

लेकिन इन घोषणाओं के बीच एक सवाल ज़ोर पकड़ रहा है—इतना पैसा आया कहाँ से?

भाजपा जब सत्ता में नहीं थी, तब ऐसे भव्य भवन क्यों नहीं बने?

यह वही पार्टी है, जिसके कार्यालय कभी किराए की इमारतों में चलते थे। केंद्र में भाजपा सरकार आने से पहले प्रदेशों में इतने भव्य, करोड़ों के कार्यालय दिखाई नहीं देते थे। आज स्थिति यह है कि एक-एक कर राज्यों में सैकड़ों करोड़ के पार्टी कार्यालय खड़े किए जा रहे हैं।

क्या यह सिर्फ राजनीतिक मजबूती का परिणाम है,

या फिर कहीं और से आने वाले अनकहे धन का प्रवाह?

जनता परेशान है—और जवाब चाहती है

जब महंगाई लगातार बढ़ रही है,

जब किसान अपनी फसलों का सही मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है,

जब बेरोज़गारों को अवसर नहीं मिल रहे,

जब सरकारी स्कूल और अस्पताल अब भी मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में हैं—

तब राजनीतिक दलों के लिए 200 करोड़ के आलीशान महल किस प्राथमिकता के तहत बनाए जा रहे हैं?

क्या लोकतंत्र की सच्ची सेवा ऐसे भवनों से हो पाएगी?

अडानी–अंबानी से दोस्ती के बाद धन का प्रवाह?

सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि पिछले वर्षों में बड़े उद्योगपतियों और सत्तारूढ़ दल के रिश्ते बार-बार चर्चा में रहे हैं।

जनता पूछ रही है—

क्या यही कारण है कि आज भाजपा के कार्यालयों में धन की रेलपेल दिखाई देती है?

क्या यह वही पैसा है जो कॉरपोरेट से राजनीतिक चंदे के नाम पर आता है?

यदि नहीं, तो पार्टी को खुलकर बताना चाहिए कि इन परियोजनाओं की वित्तीय व्यवस्था कैसे हो रही है।

लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है

राजनीतिक दलों की पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियाद होती है।

अगर दल करोड़ों–अरबों के कार्यालय बना रहे हैं, तो जनता यह जानने का अधिकार रखती है कि इसके लिए धन किस स्रोत से जुटाया गया।

पार्टी चाहे कितनी भी शक्तिशाली हो,

सत्ता कितनी भी मजबूत हो,

जनता के सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा।

आज जनता यही पूछ रही है—

200 करोड़ रुपये कहाँ से आए?किसने दिए?क्यों दिए?और किसके हित में दिए?

 

संपादकीय टीम विशाल समाचार 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button