सीतामढ़ी

आधिकारिक खंडन: सीतामढ़ी में एचआईवी मरीजों को लेकर प्रसारित खबरें भ्रामक और तथ्यहीन

आधिकारिक खंडन: सीतामढ़ी में एचआईवी मरीजों को लेकर प्रसारित खबरें भ्रामक और तथ्यहीन

सीतामढ़ी विशाल समाचार संवाददाता 

अधिकारिक खबर का किया खड़ा..

कुछ इलेक्ट्रॉनिक चैनलों में एवं अन्य समाचार माध्यमों पर सीतामढ़ी जिले में एचआईवी संक्रमित मरीजों के बारे में जो खबर चलाई गई है वह तथ्य से परे है। मालूम हो कि 1 दिसंबर 2012 को ART (anti retro viral theraphy) चिकित्सा पद्धति की शुरुआत जिले मे हुई। तब से लेकर अभी तक यानी कुल 13 वर्षों में एचआईवी संक्रमित कुल 6900 मरीज का रजिस्ट्रेशन हुआ। इनमें से कुछ लोगों की मृत्यु हुई और कुछ लोग ट्रांसफर आउट हुए। यानी दूसरे शहरों में उनका प्रॉपर इलाज चल रहा है। अभी सीतामढ़ी जिले में 4958 मरीज नियमित रूप से ART इलाज करा रहे हैं। इस संबंध में दूसरे जिलों की स्थिति देखी जा सकती है जिनके मुकाबला यहां एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या कम है। चलाई गई खबर में यह कहना कि जिले में प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है तथ्य से परे एवं भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने वाला है। वस्तुस्थिति यह है कि पुराने रजिस्टर्ड मरीज ही दैनिक रूप से दवाइयां लेने या अपना इलाज कराने /परामर्श लेने हेतु अस्पताल पहुंचते हैं। रही बात बच्चों की संक्रमण की तो केवल वही बच्चे संक्रमित हुए हैं जिनके माता-पिता पूर्व से संक्रमण का शिकार हैं और उनका भी प्रॉपर इलाज चल रहा है। अतः सीतामढ़ी जिला से संबंधित “एचआईवी संक्रमित मरीजों” के बारे में चलाई गई खबर का जिला प्रशासन खंडन करता है और अनुरोध करता है कि इस तरह की खबर प्रसारित या प्रकाशित करने से बचे जो तथ्य से परे हो और जिससे समाज में अनावश्यक भ्रम /पैनिक की स्थिति उत्पन्न होती है।

संवेदनशील बीमारी पर नियंत्रण एवं जागरूकता बढ़ाने के मद्देनज़र मीडिया से अपेक्षा है कि

वे अपने सामाजिक सरोकार, कर्तव्य और जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रस्तुत करें।

जिला प्रशासन समस्त नागरिकों से भी अपील करता है कि-

एचआईवी संक्रमित मरीजों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें।

यह संक्रमण सामान्य संपर्क से नहीं फैलता, इसलिए उनके प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और सहयोग ही समाज की वास्तविक जिम्मेदारी है।

(जिला प्रशासन सीतामढ़ी, बिहार)

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