
रीगा चीनी मिल के ट्रायल शुरू होते ही गन्ना लेकर पहुंचे किसान, लौटने लगी क्षेत्र की रौनक
कुणाल किशोर सीतामढ़ी
रीगा, सीतामढ़ी (बिहार): लंबे इंतज़ार के बाद रीगा चीनी मिल में ट्रायल प्रक्रिया की शुरुआत होते ही शुक्रवार को किसानों में नई उम्मीद की लहर दौड़ गई। बैलगाड़ियों पर गन्ना लादकर दर्जनों किसान मिल पहुँचे, जिससे परिसर में एक बार फिर पुरानी रौनक लौटती नज़र आई। कई किसानों ने कहा कि अगर इस बार मिल नियमित रूप से गन्ना पेरना शुरू कर दे, तो उनका सालों पुराना सपना सच हो जाएगा।
रीगा चीनी मिल, जो कभी उत्तर बिहार की सबसे जानी-मानी मिलों में शुमार थी, पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन ठप होने के कारण सुर्खियों में रही। अब ट्रायल रन शुरू होने से ना सिर्फ़ किसानों को राहत मिली है, बल्कि स्थानीय व्यापारी और मज़दूर वर्ग में भी रोजगार की संभावनाएँ बढ़ती दिख रही हैं।किसानों ने बताया कि मिल बंद रहने से गन्ने की खेती घाटे का सौदा बन गई थी।
सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर के कई इलाकों में किसान गन्ने से हटकर अन्य फसलों की ओर मुड़ गए थे। मगर अब एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है।मिल प्रशासन के अनुसार, इस ट्रायल फेज़ में मशीनों की टेस्टिंग और तकनीकी सुधार का कार्य जारी रहेगा।
“हम चाहते हैं कि इस सीज़न में गन्ना पेराई सुचारु रूप से चले और किसानों को समय पर भुगतान मिले,” एक अधिकारी ने बताया।स्थानीय निवासियों ने कहा कि अगर मिल पूरी क्षमता से शुरू होती है, तो यह पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। “रीगा की पहचान ही चीनी मिल से है।
जब मिल चालू रहती है, तो बाज़ार से लेकर हर घर में रौनक रहती है,” एक स्थानीय दुकानदार ने कहा।गौरतलब है कि रीगा मिल से हज़ारों किसान देश की चीनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े हैं। ट्रायल शुरू होने के साथ ही सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि कब यह पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू करे।



