पूणेमहाराष्ट्र

संगीत के माध्यम से ईश्वर का साक्षात्कार संभव : पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली ख़ान

भारत अस्मिता राष्ट्रीय पुरस्कार से उस्ताद अमजद अली ख़ान सहित चार विभूतियाँ सम्मानित

संगीत के माध्यम से ईश्वर का साक्षात्कार संभव : पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली ख़ान

भारत अस्मिता राष्ट्रीय पुरस्कार से उस्ताद अमजद अली ख़ान सहित चार विभूतियाँ सम्मानित

एमआईटी डब्ल्यूपीयू की पहल, उस्ताद अमजद अली ख़ान को भारत अस्मिता राष्ट्रीय पुरस्कार

सुरों में ईश्वर का वास है : भारत अस्मिता सम्मान समारोह में उस्ताद अमजद अली ख़ान

 

रिपोर्ट:विशाल समाचार संवाददाता 

स्थान :पुणे, महाराष्ट्र

दिनांक : 03 फरवरी 2026

“संगीत के माध्यम से ईश्वर के दर्शन होते हैं। मैं केवल संगीत के ज़रिये लोगों से संवाद करता हूँ। सुरों को समझना आवश्यक है और जब गुरु के चरणों में पूर्ण समर्पण होता है, तभी ज्ञान की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। स्वर ही ईश्वर हैं—इसी भावना से मैंने जीवनभर संगीत की सेवा की है।” यह विचार पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात सरोद वादक उस्ताद अमजद अली ख़ान ने व्यक्त किए।

 

वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी एवं एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, पुणे की ओर से आयोजित भारत अस्मिता राष्ट्रीय पुरस्कार–2026 प्रदान समारोह में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने की।

इस अवसर पर प्रख्यात वैज्ञानिक पद्म विभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष एवं भारत अस्मिता पुरस्कार समिति के संयोजक राहुल विश्वनाथ कराड, ह.भ.प. तुलसीराम दा. कराड, कुलगुरु डॉ. आर. एम. चिटणीस तथा सीईओ डॉ. प्रसाद खांडेकर भी मंचासीन थे।

कार्यक्रम में उद्यमिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए प्रो. डॉ. श्रीवर्धनी के. झा को भारत अस्मिता आचार्य श्रेष्ठ पुरस्कार, तमिलनाडु की युवा सांसद ज्योथिमणी सेन्नीमलाई को भारत अस्मिता जनप्रतिनिधि श्रेष्ठ पुरस्कार, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता पद्मश्री डॉ. मोहन आगाशे तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने हेतु पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली ख़ान को भारत अस्मिता जन-जागरण श्रेष्ठ पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रत्येक पुरस्कार में ₹2.50 लाख की राशि, सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न शामिल था।

मुख्य अतिथि डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने कहा कि “हम ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना कर रहे हैं, परंतु विकास के लिए इतने वर्षों की प्रतीक्षा आवश्यक नहीं। समाजहित में कार्य करने वाले सभी पुरस्कार विजेता युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और सभी को उनसे सीख लेकर सामाजिक कार्य में आगे आना चाहिए।”

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि आज के समय में मूल्याधारित शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को सदैव वरिष्ठों से सीखते रहना चाहिए। संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा प्रदर्शित मार्ग पर चलकर विनाश की ओर बढ़ती दुनिया को सही दिशा दी जा सकती है।

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल कराड ने कहा कि भारत अस्मिता पुरस्कार राष्ट्र के गौरव को सुदृढ़ करने वाला मंच है।

 

पुरस्कार स्वीकार करते हुए प्रो. डॉ. श्रीवर्धनी के. झा ने कहा कि शांति एवं मानवीय मूल्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और यह सम्मान उनके कार्यों के प्रति बढ़ी हुई सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराता है।

सांसद ज्योथिमणी सेन्नीमलाई ने कहा कि मूल्य ही मनुष्य को जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।

वहीं अभिनेता डॉ. मोहन आगाशे ने कहा कि “अध्यात्म विज्ञान के बिना और विज्ञान अध्यात्म के बिना अधूरा है।”

इस अवसर पर हाल ही में दुर्घटना में निधन हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. गौतम बापट ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. आर. एम. चिटणीस ने किया।

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