
शेतकऱ्यांचा सातबारा कोरा करें, नहीं तो मंत्रालय पर आक्रोश मार्च – एडवोकेट शंकर चव्हाण
रिपोर्ट:विशाल समाचार
स्थान: मुंबई ,महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। राज्य सरकार द्वारा घोषित दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी को अधूरी और भ्रामक बताते हुए मुंबई उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एडवोकेट शंकर चव्हाण ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की है कि राज्य के सभी किसानों का सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) पूरी तरह कर्जमुक्त किया जाए, अन्यथा किसानों के साथ मिलकर मुंबई स्थित मंत्रालय पर आक्रोश मार्च निकाला जाएगा।
एडवोकेट चव्हाण ने सोशल मीडिया के माध्यम से मीडिया को दी गई प्रतिक्रिया में कहा कि विधानसभा अधिवेशन के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने राज्य के किसानों के लिए दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा की है। लेकिन चुनाव से पहले पूरे महाराष्ट्र के किसानों का सातबारा कोरा करने और सरसकट कर्जमाफी देने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था। ऐसे में मौजूदा घोषणा किसानों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती।
उन्होंने कहा कि राज्य के कई किसान आज भी कर्ज के भारी बोझ तले दबे हुए हैं। प्राकृतिक आपदाएं, फसल नुकसान, बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। ऐसे में केवल दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी घोषित कर सरकार ने किसानों की मूल समस्या को नजरअंदाज किया है।
एडवोकेट चव्हाण ने आगे कहा कि किसानों से किया गया वादा निभाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। चुनाव से पहले दिए गए आश्वासन के अनुसार पूरे महाराष्ट्र के किसानों का सातबारा कोरा कर सरसकट कर्जमाफी लागू की जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो किसानों में तीव्र नाराजगी पैदा होगी और सरकार के खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के अधिकार और न्याय के लिए वह अंत तक संघर्ष करेंगे। जब तक किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा पूरी तरह हल नहीं होता, तब तक वह शांत नहीं बैठेंगे। जरूरत पड़ने पर राज्यभर के किसानों को एकजुट कर मुंबई में मंत्रालय पर आक्रोश मार्च निकाला जाएगा।

इस बीच कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों ने भी कर्जमाफी के मुद्दे पर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि खेती महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और जब तक किसान आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होगा, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।
एडवोकेट शंकर चव्हाण के इस बयान के बाद राज्य में किसानों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सातबारा कोरा करने की मांग और संभावित आंदोलन की चेतावनी से आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।


