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अवकाश कटौती आदेश वापस नहीं लिया तो राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत करेगा शिक्षा मंत्री का विरोध

अवकाश कटौती आदेश वापस नहीं लिया तो राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत करेगा शिक्षा मंत्री का विरोध

 

रिपोर्ट:विशाल समाचार 

स्थान: धौलपुर राजस्थान 

31 मार्च 2026 को शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार द्वारा शिविरा जारी की गई जिसमें जिसमें ग्रीष्मकालीन अवकाश 17 मई से 20 जून 2026 तक रखे गए तथा संस्था प्रधान द्वारा घोषित अवकाश भी दो से घटाकर एक कर दिया गया! जिससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है! राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत द्वारा 7 अप्रैल 2026 को संपूर्ण राजस्थान में जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया था! लेकिन अभी तक कोई परिणाम नहीं आया है!

संघठन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ रणजीत मीना ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और छात्र छात्राओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अवकाश कटौती आदेश वापस नहीं लेता है और पूर्व कि भांति 17 मई से 30 जून तक अवकाश घोषित नहीं करता है तो 30 अप्रैल 2026 के बाद बड़ा आन्दोलन किया जाएगा तथा शिक्षा मंत्री का विरोध किया जायेगा।

 

प्रदेश मुख्य संरक्षक गिरिराज शर्मा , प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रभान चौधरी और प्रदेश उपाध्यक्ष गंगाराम गुर्जर ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक संघों के साथ हुई बैठक में संगठन द्वारा अवकाश कटौती का विरोध किया था प्रदेश के शिक्षकों द्वारा SIR जैसे बेहद जटिल कार्य को शिक्षकों ने तय समय में करके सरकार और विभाग की छवि को बनाया था। प्रदेश के शिक्षकों ने तय समय में पाठ्यक्रम पूरा कराया फिर बोर्ड परीक्षा कराई उसके बाद लोकल परीक्षाएं आयोजित कराने में अपनी भूमिका निभाई फिर तय समय में परिणाम जारी किया यहां तक कि नए शैक्षणिक सत्र को भी 1 अप्रेल से प्रारंभ कराया उसके बावजूद विभाग द्वारा अवकाश कटौती किया जाना पूरी तरह से गलत है। प्रदेश का शिक्षक विभाग की इस कारगुज़ारी से अपने आप को लज्जित महसूस कर रहा है और संगठन को बड़े आंदोलन के लिए निवेदन कर रहा है संगठन ने भी तय किया है कि विभाग इसी प्रकार हट लगाकर अपनी मनमानी करता है और अवकाश कटौती आदेश में संशोधन नहीं करता है तो प्रदेश की राजधानी में एक बड़े आंदोलन की तैयारी है साथ ही जहां जहां शिक्षा मंत्री जाएंगे उनका विरोध किया जाएगा। राजस्थान शिक्षक संघ एकीकृत को लगभग एक दर्जन संगठन इस आंदोलन के लिए अपना समर्थन दे रहे हैं।

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