
वर्ल्ड युबीई स्पाईन सोसायटी के भारतीय उपखंड शाखा की स्थापना
पुणे के स्पाईन सर्जन डॉ.शैलेश हदगांवकर संस्थापक अध्यक्षपदी चुने गए
स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे : वर्ल्ड युनिलॅटरल बाय-पोर्टल एंडोस्कोपिक (युबीई) स्पाईन सोसायटी द्वारा भारतीय उपखंड शाखा का औपचारिक उद्घाटन हाल ही में दक्षिण कोरिया के सेऊल में सम्पन्न हुए वर्ल्ड यूबीई वार्षिक परिषद में किया गया. भारत,नेपाल,श्रीलंका और बांग्लादेश के स्पाईन सर्जन्स को इस माध्यम से एक शैक्षणिक और वैद्यकीय मंच पर एक साथ लाया गया है.
पुणे के प्रख्यात स्पाईन सर्जन और संचेती हॉस्पिटल पुणे के स्पाईन ॲन्ड न्यूरो सायन्स युनिट के प्रमुख डॉ.शैलेश हदगांवकर इनको हालही में कोरिया के सेऊल में हुए वर्ल्ड युबीई स्पाईन परिषद में इंडिया चॅप्टर के संस्थापक अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया. वर्ल्ड युबीई स्पाईन सोसायटी के अध्यक्ष जिऑनफ युन पार्क की उपस्थिति में यह घोषणा की गई.यह नियुक्ति भारतीय उपखंड के एंडोस्कोपिक स्पाईन सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें शैक्षणिक उत्कृष्टता,संशोधन और जागतिक सहयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा.
इस शाखा के मुख्य नेतृत्व मंडल में सरसचिव डॉ.केतन देशपांडे,उपाध्यक्ष डॉ.अमोल रेगे और कोलकाता के स्पाइन सर्जन व खजिनदार डॉ.अनिंद्या बासू इनका समावेश है.
डॉ. हदगांवकर इन्होने सर्व्हायकल स्पाईन एंडोस्कोपी (युबीई ), थोरॅसिक स्पाईन तथा लंबर स्पाईन युबीई और थ्रीडी नेव्हिगेशन के साथ फ्युजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है. वे अग्रणी एंडोस्कोपिक (यूबीई) स्पाइन सर्जन हैं और उनके विस्तृत कार्य पर कई संशोधन पर लेख प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने कई विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया है. विविध एंडोस्कोपिक और कॅडेव्हर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं.इस क्षेत्र में उन्हें एक अग्रणी नेतृत्व के रूप में जाना जाता है.
एक सर्वसमावेशक संघटनात्मक रचना स्थापित की गई है, जिसमें कार्यकारी,वैज्ञानिक और शैक्षणिक समितियों का समावेश है. इसके साथ देशभर की विविध संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 30 कार्यकारी सदस्य इसमें शामिल हैं.
युनिलॅटरल बाय-पोर्टल एंडोस्कोपिक (युबीई) स्पाइन सर्जरी यह अत्याधुनिक और कम से कम छेद वाली सर्जरी है, जिसमें रीढ़ तक अचूकता से पहुंचने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एंडोस्कोपिक कॅमेरा के लिए और दूसरा सर्जरी के उपकरण के लिए ऐसे दो छोटे पोर्टल्स का उपयोग किया जाता है. इस एंडोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से सर्जन छोटे छेद लगाकर सर्जरी कर सकते हैं और उसी समय स्क्रीन पर संपूर्ण ऑपरेशन कर रहे क्षेत्र का स्पष्ट दृश्य लगातार देख सकते हैं. इससे आसपास की मांसपेशियों, स्नायूबंध और ऊतकों को होने वाला नुकसान कम होता है. पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में बड़े छेद, सखोल विच्छेदन से बचा जा सकता है, रक्तस्राव कम होता है,ऑपरेशन के बाद दर्द कम रहता है और मरीज जल्दी ठीक होता है ऐसा डॉ. अमोल रेगे ने बताया.
डॉ.केतन देशपांडे ने कहा की,युबीई तकनीक का उपयोग गर्दन, पीठ का मध्य भाग और कमर तक पूरे स्पाइन की सर्जरी में प्रभावी रूप से की जा सकती है. स्लिप डिस्क,स्पायनल स्टेनोसिस,नर्व्ह कॉम्प्रेशन,संसर्ग और कुछ प्रक्रियाओं में भी यह तकनीक उपयुक्त साबित हो रही है.
डॉ.अनिंद्या बासू ने कहा की, यह तकनीक एंडोस्कोपी के फायदे और पारंपरिक सर्जिकल उपकरणों की लवचिकता का संगम है. जिसके कारण आधुनिक स्पाईन उपचार में यह अधिक बहुउपयोगी और पसंदीदा विकल्प बन रही है. पिछले दशक में कोरिया में विकसित हुई यह तकनीक अब दुनियाभर में बड़े पैमानेपर अपनाई जा रही है. लागत के दृष्टिकोण से किफायती और उपयोग में सरल होने के कारण यह तकनीक छोटे अस्पतालों के लिए भी उपयोगी है.
डॉ.शैलेश हदगांवकर ने कहा की,भारत में स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है. इस तकनीक का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग करने के लिए इंडिया चॅप्टर के माध्यम से संरचित शैक्षणिक कार्यक्रम,प्रमाणित प्रशिक्षण सत्र और फेलोशिप अवसर विकसित किए जाएंगे.भारत में लगभग 9 से 10 हजार स्पाइन सर्जन हैं और एंडोस्कोपिक तकनीक की ओर परिवर्तित होनेवाले युवा तथा अनुभवी न्यूरोसर्जन और आर्थोपेडिक स्पाईन विशेषज्ञों के लिए उपयुक्त होगी.
इंडिया चॅप्टर का अधिकृत स्थापना समारोह 20 और 21 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के अग्रणी स्पाइन विशेषज्ञ पहली बार प्रत्यक्ष रूप से एक साथ आएंगे।इससे पहले कुछ सप्ताह पूर्व एक प्राथमिक व्हर्च्युअल बैठक भी आयोजित की गई थी.
डॉ.हदगांवकर ने कहा की, इंडिया चॅप्टर यह अमेरिका,ऑस्ट्रेलिया,चीन और कोरिया के जागतिक युबीई चॅप्टर्स से संलग्न रहेगा.आंतरराष्ट्रीय सहकार्य,कार्यशाला और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से इस क्षेत्र में कम से कम छेद वाली सर्जरी के भविष्य को नई दिशा मिलेगी.


