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40 वर्षीय महिला के अवयवदान से चार लोगों को मिला नया जीवन

40 वर्षीय महिला के अवयवदान से चार लोगों को मिला नया जीवन

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, दौंड की 40 वर्षीय बीमा प्रतिनिधि (इंश्योरेंस एजेंट) महिला के अवयव दान से चार लोगों को नया जीवन मिला है. ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके परिवार ने अवयव दान का साहसिक निर्णय लिया.

 

सड़क दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए 7 जुलाई को नोबल हॉस्पिटल्स अँड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था. 9 जुलाई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया. इस दुखद प्रसंग में उनके परिवार ने अवयवदान के लिए सहमति देकर अपने व्यक्तिगत दुख को दूसरों के लिए आशा की किरण में बदल दिया.

 

10 जुलाई 2026 को अवयव निकलने (ऑर्गन रिट्रीवल) की शस्त्रक्रिया की गई.

 

नोबल हॉस्पिटल्स अँड रिसर्च सेंटर के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. संजय पठारे ने बताया कि दाता के लंग्स, यकृत और दोनों किडनी निकाली गई. इनमें से यकृत और एक किडनी का प्रत्यारोपण नोबल हॉस्पिटल में किया गया, जबकि दूसरी किडनी और लंग्स ज़ेडटीसीसी के माध्यम से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पुणे के अन्य अस्पतालों में भेजे गए.

 

यकृत प्रत्यारोपण 59 वर्षीय ऐसे पुरुष मरीज पर किया गया जो दीर्घकालीन गंभीर लिवर रोग से पीड़ित थे. वहीं, किडनी फेल होने से ग्रस्त 49 वर्षीय महिला मरीज की किडनी का प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया गया.

 

इस प्रत्यारोपण प्रक्रिया में लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ.मनोज श्रीवास्तव और डॉ. स्मिता पारख, किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विक्रम सातव, मेडिकल सोशल वर्कर और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर श्री महेश तुपे तथा संपूर्ण प्रत्यारोपण टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

 

नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर के उपव्यस्थापकीय संचालक डॉ. दिविज माने ने कहा, “अत्यंत दुख की इस घड़ी में भी दाता के परिवार ने अपने व्यक्तिगत दुःख से ऊपर उठकर अवयवदान का निर्णय लिया. उनकी इस असाधारण उदारता को हम मनःपूर्वक सलाम करते हैं. साथ ही इस जीवनदायी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में सहयोग देने वाले ज़ेडटीसीसी पुणे, ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने वाली ट्रैफिक पुलिस तथा सभी आरोग्यसेवा टीम का भी हम हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं”

 

 

निःस्वार्थ सेवा और परिवार के प्रति अटूट समर्पण

 

इस महिला का पूरा जीवन निःस्वार्थ सेवा और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक था. उनकी दोनों बड़ी बहनों का विवाह हो चुका था, लेकिन पिता के अकाली निधन के बाद उन्होंने अपनी माँ की देखभाल की जिम्मेदारी निभाने के लिए स्वयं विवाह न करने का निर्णय लिया. दुर्भाग्यवश एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया. लेकिन उनकी मानवता और सेवा की भावना मृत्यु के बाद भी जीवित रह. उनके अवयवदान से उनकी दोनों किडनी, यकृत और लंग्स के माध्यम से चार लोगों को नया जीवन मिला.

 

उनका प्रेरणादायी जीवन समाज को एक अमूल्य संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी अवयव दान के माध्यम से एक व्यक्ति कई लोगों को जीवनदान दे सकता है और अनेक परिवारों के जीवन में नई उम्मी

द जगा सकता है.

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