संपादकीय

मैं पत्रकार हूं, भीड़ तंत्र का नहीं, लोकतंत्र का हिस्सा हूं

मैं पत्रकार हूं, भीड़ तंत्र का नहीं, लोकतंत्र का हिस्सा हूं

 

विशाल समाचार ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई भी दिखाई, लाठीचार्ज के दृश्य भी दिखाए और घायल पुलिसकर्मियों के साथ-साथ घायल युवाओं की स्थिति भी जनता के सामने रखी। हमने पत्थरबाजी, गाड़ियों में तोड़फोड़, इलेक्ट्रिक शॉक, आंसू गैस और घटनास्थल के हर महत्वपूर्ण दृश्य जनता तक पहुंचाए।

हम 24 घंटे खबर दिखाने वाला समाचार चैनल हैं। हमारा दायित्व किसी एक पक्ष को नहीं, बल्कि घटना के हर पहलू को जनता के सामने रखना है। पत्रकारिता का धर्म यही है कि जो हुआ, उसे तथ्यों के साथ दिखाया जाए।

दुर्भाग्य की बात है कि आज सोशल मीडिया पर कुछ लोग केवल 20–30 सेकंड की क्लिप काटकर पूरे घटनाक्रम को अलग रूप में पेश करते हैं और चैनलों तथा पत्रकारों की नीयत पर सवाल उठाते हैं। लेकिन कुछ सेकंड की वीडियो पूरी सच्चाई का विकल्प नहीं हो सकती।

मैं पिछले 26 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं। हमने हमेशा बिना किसी दबाव और बिना किसी डर के अपना काम किया है। हमारा उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि सच को जनता तक पहुंचाना है।

मीडिया से असहमति रखना हर नागरिक का अधिकार है और मीडिया का दायित्व है कि वह हर पक्ष को सामने लाए। यदि किसी खबर पर आपत्ति है तो उसका जवाब तथ्यों से दीजिए, अपनी बात रखिए, लेकिन पत्रकारों को निशाना बनाना या उनकी नीयत पर सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।

जिस दिन भीड़ यह तय करने लगेगी कि कौन पत्रकार खबर करेगा और कौन नहीं, उस दिन लोकतंत्र कमजोर होने लगेगा। लोकतंत्र संवाद, तथ्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से चलता है, दबाव और भय से नहीं।

मैं पत्रकार हूं। मेरा काम भीड़ बनना नहीं, भीड़ के बीच खड़े होकर सच दिखाना है। मैं किसी विचारधारा का नहीं, तथ्यों का पक्षधर हूं। मैं भीड़ तंत्र का हिस्सा नहीं, लोकतंत्र का हिस्सा हूं।

 

आपका

डीएस तोमर 

विशाल समाचार

संपादक व मुख्य संरक्षक 

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