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पुणे में फॉक्सस्कैन और गृह संजीवन फाउंडेशन ने शुरू किया AI आधारित बिल्डिंग डायग्नोस्टिक एक्सपीरियंस सेंटर

पुणे में फॉक्सस्कैन और गृह संजीवन फाउंडेशन ने शुरू किया AI आधारित बिल्डिंग डायग्नोस्टिक एक्सपीरियंस सेंटर

 

४० हजार से अधिक निरीक्षण की गई संपत्तियों के डेटा पर आधारित तकनीक; निवारक भवन रखरखाव और कौशल विकास पर जोर

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे : इमारतों के निरीक्षण, खामियों की पहचान और रखरखाव में तकनीक एवं डेटा के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गृह संजीवन फाउंडेशन और फॉक्सस्कैन ने संयुक्त रूप से पुणे में बिल्डिंग डायग्नोस्टिक एक्सपीरियंस सेंटर शुरू किया है। यह एक गैर-लाभकारी पहल है, जिसका उद्देश्य भवनों की जांच और निदान को अधिक सटीक, सुलभ, किफायती और व्यावहारिक बनाना है। साथ ही ठेकेदारों, सिविल क्षेत्र के पेशेवरों, पेंटरों और भवन रखरखाव से जुड़े कर्मचारियों के लिए कौशल विकास के अवसर तैयार करना भी इस पहल का उद्देश्य है।

इस एक्सपीरियंस सेंटर में तकनीक की मदद से इमारतों से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान और बेहतर रखरखाव संबंधी निर्णय लेने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा।

फॉक्सस्कैन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक जगदाले ने कहा, “उद्योग में रसायनों और पेंट उत्पादों की कोई कमी नहीं है, लेकिन लगातार और सटीक निदान की वास्तविक जरूरत है। विशेष रूप से तैयार किए गए हार्डवेयर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सॉफ्टवेयर और ४० हजार से अधिक निरीक्षण की गई संपत्तियों से प्राप्त डेटा को एक साथ लाकर फॉक्सस्कैन इस आवश्यक इंटेलिजेंस लेयर को विकसित कर रहा है। हमारा उद्देश्य पेशेवरों को अधिक सटीक निदान करने, समस्याओं को प्रमाण के साथ समझाने और कुछ ही सेकंड में उपयोगी रिपोर्ट तैयार करने में मदद करना है।”

भारतीय निर्माण और भवन रखरखाव की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह तकनीक विकसित की गई है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाली इमेजिंग, सतह का माप लेने के लिए एकीकृत लेजर मापन प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित दोष विश्लेषण, रीइन्फोर्समेंट लर्निंग क्षमता, स्वचालित डायग्नोस्टिक रिपोर्ट तथा संभावित उपचार और सुधारात्मक उपायों के लिए संरचित सुझाव शामिल हैं। यह डायग्नोस्टिक मॉडल ४० हजार से अधिक निरीक्षण की गई संपत्तियों से प्राप्त डेटा और अनुभव के आधार पर विकसित किया गया है।

सामान्य थर्मल इमेजिंग प्रणाली मुख्य रूप से तापमान में होने वाले बदलावों की पहचान करती है। इसके विपरीत, यह प्लेटफॉर्म एक व्यापक बिल्डिंग डायग्नोस्टिक इंटेलिजेंस सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें निरीक्षण, विश्लेषण और निदान को एक व्यवस्थित प्रक्रिया में लाने पर जोर दिया गया है।

 

इमारतों में नमी, सीलन और सतह की खराबी जैसी समस्याएं कई बार शुरुआती स्तर पर दिखाई नहीं देतीं। तकनीक आधारित निदान की मदद से मरम्मत, पेंटिंग या इंटीरियर का काम शुरू करने से पहले ऐसी स्थितियों की पहचान और उनका आकलन किया जा सकता है। इससे अनावश्यक मरम्मत, बार-बार किए जाने वाले हस्तक्षेप, सामग्री की बर्बादी और दोबारा होने वाले काम को कम करने में मदद मिल सकती है।

गृह संजीवन फाउंडेशन के अध्यक्ष मिलिंद जगताप ने कहा, “उन्नत बिल्डिंग डायग्नोस्टिक्स को केवल विशेषज्ञों तक सीमित न रखते हुए ठेकेदारों, पेंटरों, इंजीनियरों और हाउसिंग सोसायटियों के लिए भी सुलभ बनाना इस पहल का उद्देश्य है। पेशेवरों के कौशल को बढ़ाकर और निरीक्षण की लागत लगभग ५०० रुपये तक लाकर हम आजीविका में सुधार, गलत मरम्मत और अनावश्यक सामग्री के इस्तेमाल को कम करना चाहते हैं। साथ ही भवन रखरखाव को प्रतिक्रियात्मक मरम्मत से निवारक देखभाल की ओर ले जाना हमारा लक्ष्य है।”

इस तकनीक का उपयोग पेंटिंग, इंटीरियर, सिविल कार्य और भवन रखरखाव के विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। हाउसिंग सोसायटियों के रखरखाव पर्यवेक्षकों के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों का भी प्रस्ताव है। ठेकेदारों, पेंटरों, सिविल इंजीनियरों और रखरखाव पेशेवरों के कौशल विकास, अनावश्यक मरम्मत एवं संसाधनों के उपयोग को कम करने, इमारतों के उपयोगी जीवन को बढ़ाने तथा अधिक टिकाऊ रखरखाव पद्धतियों को बढ़ावा देना इस पहल का व्यापक उद्देश्य है।

 

 

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