पूरे प्रदेश से लगभग 2 हजार आशा वर्कर्स बुधवार को लखनऊ पहुंचीं
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान लखनऊ उत्तर प्रदेश
पूरे प्रदेश से लगभग 2 हजार आशा वर्कर्स बुधवार को लखनऊ पहुंचीं। इको गार्डन में वेतन बढ़वाने की मांग के साथ जमकर नारेबाजी की। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन संबद्ध ऑल इंडिया सेंट्रल कांउसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (ऐक्टू) के बैनर तले प्रदर्शन किया। महिलाओं ने नारा लगाया- ‘एक कटोरी दो समोसा, योगी तेरा क्या भरोसा’।
आशा वर्कर्स का कहना है कि 5 सूत्री मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकार उनके कामों को नजरअंदाज कर रही है। अगर चुनाव से पहले मांग पूरी नहीं हुई तो यह सरकार गिरा देंगे। अधिकारी लगातार हमारा शोषण कर रहे हैं। बात सुनने को तैयार नहीं है।
प्रदर्शन कर रही रंजना ने बताया कि 3 से 4 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि मिलती है। इसमें घर चला पाना संभव नहीं है। अधिकतर आशा वर्कर कर्ज में डूबी हुई हैं। एक झाड़ू-पोंछा करने वाली बाई से भी ज्यादा खराब जिंदगी जीने पर मजबूर हैं। हम लोग सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाते हैं। गर्भवती महिला की बीमारी से लेकर डिलीवरी तक उसका साथ देते हैं। हजारों जिंदगियों को बचाते हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
आशा वर्कर्स की मांगें…
1. आशा कर्मियों को 45/46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप राज्य स्वास्थ्यकर्मी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, ESI, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन गारंटी मिले।
2. 10 लाख रुपए के स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख के जीवन बीमा गारंटी दी जाए।
3. आशा कर्मियों के काम के घंटे तय किए जाएं।
4. 2017 से अब तक के लंबित भुगतानों का आकलन कर उसका भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
5. प्रदेशभर में भुगतान के नाम पर होने वाली वार्षिक घूसखोरी रोकने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाए।
‘काम 24 घंटे, मानदेय का पता नहीं ’
प्रयागराज से आई रंजना ने बताया कि वह 11 साल से आशा वर्कर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। 24 घंटे काम करते हैं, मगर वेतन के रूप में कुछ भी नहीं मिलता। हमारे मानदेय तय करते हुए राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सब्जी मंडी की तरह हमें काम के पैसे मिलते हैं। जैसे- आलू और भिंडी का दाम अलग होता है, वैसे हमारे काम का दाम अलग है।
प्रोत्साहन राशि के रूप में 2000 से लेकर 3500 रुपए तक मिलता है, जिसमें आने-जाने का किराया भी नहीं पूरा होता। उसमें परिवार का पेट पालना बच्चों की फीस भरना तो दूर की बात। टीकाकरण का ₹75 और डिलीवरी का ₹600 मिलता है, वह भी 9 महीने के बाद। हम लोग परेशान हो चुके हैं। अब बिना अधिकार लिए पीछे हटने वाले नहीं।


