
आरक्षण उपवर्गीकरण पर समतोल और सर्वसमावेशी विचार जरूरी: डॉ. हुलगेश चलवादी
महाराष्ट्र में अनुसूचित जातियों के आरक्षण उपवर्गीकरण को लेकर जारी बहस के बीच आरपीआई (ए) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने सभी पक्षों से संतुलित और सर्वसमावेशी दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे,महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में अनुसूचित जातियों के आरक्षण के उपवर्गीकरण को लेकर सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चा के बीच रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रमुख तथा केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री Ramdas Athawale की भूमिका को आधार बनाते हुए पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है।
डॉ. चलवादी ने कहा कि आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम और सबसे वंचित वर्ग तक पहुंचना चाहिए, लेकिन उपवर्गीकरण के कारण दलित समाज में किसी प्रकार की फूट नहीं पड़नी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर किसी भी निर्णय से पहले सभी समुदायों की भावनाओं को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य में अनुसूचित जाति के भीतर 59 उपजातियां शामिल हैं, जिनमें कुछ वर्गों ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर प्रगति की है, जबकि कुछ अभी भी पीछे हैं। इसी असमानता के कारण कुछ संगठनों द्वारा उपवर्गीकरण की मांग की जा रही है।
डॉ. चलवादी ने विशेष रूप से कहा कि बौद्ध समाज ने पिछले कुछ दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, इसलिए किसी भी नीति परिवर्तन में उनके अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी अनुसूचित जाति समुदायों को एकजुट रहकर संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचे, लेकिन समाज में विभाजन न हो।
आरपीआई (ए) की ओर से कहा गया कि सरकार को इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि जनगणना और वास्तविक आंकड़ों के आधार पर सभी पक्षों से चर्चा कर एक संतुलित और न्यायपूर्ण रास्ता निकालना चाहिए।


