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मराठी फिल्म महामंडल चुनाव में घमासान, शरद लोणकर बोले- ‘दोनों पैनल एक ही सिक्के के दो पहलू’

मराठी फिल्म महामंडल चुनाव में घमासान, शरद लोणकर बोले- ‘दोनों पैनल एक ही सिक्के के दो पहलू’

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र 

पुणे। अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल के आगामी चुनाव को लेकर माहौल गरमा गया है। वितरण एवं प्रचार विभाग से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार शरद लोणकर ने आरोप लगाया है कि चुनाव मैदान में आमने-सामने दिखाई देने वाले दोनों प्रमुख पैनल वास्तव में एक ही विचारधारा के हैं और उनके बीच का संघर्ष केवल दिखावा है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों से महामंडल का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों ने फिल्म उद्योग की समस्याओं को सुलझाने के बजाय आंतरिक विवादों और राजनीति में अधिक समय बिताया।

पुणे में आयोजित पत्रकार वार्ता में लोणकर ने बताया कि महामंडल और सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए आठ निर्दलीय उम्मीदवारों ने एकजुट होकर स्वतंत्र मोर्चा बनाया है। इस अवसर पर निर्देशक अमोल भावे, निर्माता महादेव शिरोळकर, मानसिंग कदम, कला निर्देशक उल्हास लांडगे तथा अभिनेत्री एवं निर्माता भाग्यश्री देसाई मौजूद थीं। उन्होंने दावा किया कि अभिनेत्री स्मिता गोंदकर और शाहीर संभाजी भगत समेत कई लोगों का समर्थन उन्हें प्राप्त है।

लोणकर ने आरोप लगाया कि दोनों प्रमुख पैनलों के कई पूर्व संचालक अलग-अलग गुटों से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनके बीच आपसी तालमेल साफ दिखाई देता है। कुछ उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनवाने के लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की मदद की है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को “मिलीभगत” करार दिया।

उन्होंने चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप से भी इनकार करने वाले दावों को खारिज करते हुए कहा कि कई उम्मीदवारों और राजनीतिक नेताओं के संबंध जगजाहिर हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर राजनीतिक प्रभाव बना हुआ है।

फिल्म उद्योग के मुद्दों की अनदेखी का आरोप

लोणकर ने प्रचार और वितरण व्यवसाय के नाम पर आर्थिक शोषण होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पिछले चार दशकों से फिल्म प्रचार का कार्य नि:शुल्क किया है। उन्होंने महामंडल में नए नेतृत्व को मौका देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सदस्यों से बदलाव के पक्ष में मतदान करने की अपील की।

निर्देशक अमोल भावे ने भी पिछले दशक के कार्यकाल की आलोचना करते हुए कहा कि कलाकारों, तकनीशियनों और सदस्यों की मूलभूत समस्याओं की लगातार उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि दिवंगत अभिनेता विक्रम गोखले द्वारा जरूरतमंद कलाकारों के लिए आवास और वृद्धाश्रम हेतु उपलब्ध कराई गई जमीन पर अब तक कोई ठोस काम नहीं हुआ है।

निर्माता महादेव शिरोळकर ने आरोप लगाया कि महामंडल के संविधान में किए गए बदलावों, संपत्ति निर्माण और वित्तीय निर्णयों की पर्याप्त जानकारी सदस्यों को नहीं दी गई। वहीं, भाग्यश्री देसाई ने दावा किया कि लगभग 40 हजार संभावित मतदाताओं को मतदान अधिकार से वंचित रखा गया है। उन्होंने मतदाता सूची में मृत सदस्यों के नाम बने रहने और फिल्म उद्योग से असंबंधित लोगों के नाम शामिल होने पर भी सवाल उठाए।

निर्दलीय समूह ने दावा किया कि यदि पुणे, मुंबई और राज्यभर के सदस्य बड़ी संख्या में मतदान करते हैं तो ईमानदार और नए नेतृत्व को अवसर मिल सकता है, जिससे महामंडल की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आएगा।

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