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बिधूना क्षेत्र में विकास का अभाव जन समस्याओं से परेशान लोगों में दिख रहा ताव

बिधूना क्षेत्र में विकास का अभाव जन समस्याओं से परेशान लोगों में दिख रहा ताव

विधानसभा चुनाव नजदीक फिर भी समस्याओं का अंबार कहीं हो ना जाए कुछ सियासतदारों की मंशा तार तार

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: औरैया उत्तर प्रदेश

बिधूना,औरैया : बिधूना तहसील क्षेत्र कहने को तो तमाम सुविख्यात सियासतदारों की कर्मभूमि रहा है लेकिन इसके बावजूद भी यह क्षेत्र आज तक अपेक्षित विकास से अलग थलग पड़ा हुआ है जिसके चलते क्षेत्रीय लोग समस्याओं के मकड़जाल में फंसे कराह रहे हैं। प्रत्येक चुनाव में जनता को विकास के लुभावने सब्जबाग तो दिखाए जाते हैं लेकिन चुनाव बाद यह है वायदे सिर्फ आज तक खोखले साबित होते नजर आए हैं जिससे इस बार क्षेत्रीय जनता कुछ तथाकथित सियासतदारों के गैर जिम्मेदाराना रवैए से नाराज नजर आ रही है और ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में सियासतदारों को जनता की बेरुखी का सामना करने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। देश की आजादी के बाद बिधूना तहसील क्षेत्र देश के तमाम सुविख्यात सियासतदारों की कर्मभूमि रहा है लेकिन इसके बावजूद भी इस क्षेत्र में अपेक्षित विकास का भारी अभाव है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि प्रत्येक चुनाव के समय सियासतदारों द्वारा उन्हें क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के खूब लुभावने सब्जबाग दिखाए जाते हैं लेकिन चुनाव बाद यह चुनावी वायदे सिर्फ खोखले साबित होते नजर आते हैं। .सबसे गौरतलब बात तो यह है कि वैसे तो एक ओर क्षेत्र में अपेक्षित विकास का अभाव है दूसरी ओर जो विकास कार्य कराए भी गए हैं उनका आज तक क्षेत्रीय जनता को लाभ नहीं मिल सका है ऐसे विकास कार्यों में बिधूना में लगभग दो दशक से अधिक समय पूर्व बना रोडवेज बस स्टेशन प्रमुख है। यही नहीं इस तहसील मुख्यालय को आज तक पॉलिटेक्निक कॉलेज, खेलकूद स्टेडियम भी नसीब नहीं हो सका है वहीं दूसरी और आज तक बिधूना तहसील मुख्यालय का राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय किराए के छोटे से भवन में चलता नजर आ रहा है उसे अपना निजी भवन भी नसीब नहीं हो सका है। इस क्षेत्र में आज तक कई ऐसे गांव भी हैं जो पक्की सड़क से भी नहीं जुड़ सके हैं वहीं दूसरी ओर तमाम गरीब आवास के अभाव में झोपड़पट्टी में जिंदगी बिताने को मजबूर है जबकि दूसरी ओर इस क्षेत्र के तमाम गांवों की कच्ची गलियां और कीचड़ गंदगी से बजबजाती नालियां यहां की पहचान बनी हुई है। यूं तो बिधूना में 30 शैया व 50 शैया अस्पताल मौजूद हैं लेकिन आज तक इनमें विशेषज्ञों का भारी अभाव है जिससे क्षेत्रीय लोगों को सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का भी अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव फिर सन्निकट आ गए हैं किंतु इस क्षेत्र में आज तक लोग समस्याओं के मकडजाल में फंसे कराह रहे हैं ऐसे में इस बार जनता की नाराजगी से अधिकांश सियासतदारों को जनता की बेरुखी का सामना करने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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