
‘स्वराज्य कायम रहे और सुराज्य स्थापित हो, इसके लिए वंदे मातरम् जरूरी’
सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने बताया ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रमंत्र का महत्व
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे (प्रतिनिधि)। अनेक लोगों के त्याग और बलिदान से प्राप्त स्वराज्य को कायम रखने तथा देश में सुराज्य स्थापित करने के लिए युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम के संस्कार विकसित करना आवश्यक है। इसके लिए ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रमंत्र में अपार सामर्थ्य है। यह बात सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने कही। उन्होंने युवा पीढ़ी तक संपूर्ण ‘वंदे मातरम्’ गीत पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नागरिक सोशल फाउंडेशन के शिक्षा विभाग की ओर से स्कूली विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘संपूर्ण वंदे मातरम् गायन’ प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में सांसद कुलकर्णी बोल रही थीं। कार्यक्रम में महापौर मंजुषा नागपुरे, ‘वंदे मातरम्’ के अभ्यासक मिलिंद सबनीस, नागरिक सोशल फाउंडेशन के ट्रस्टी अमेय सप्रे, प्रतियोगिता की समन्वयक डॉ. शीतल गोडबोले, स्मिता देशपांडे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे। प्रतियोगिता को विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों से उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला। इसमें 600 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गीत का स्मरण करते समय कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के सामने दुर्गा माता के रूप में लक्ष्मी, सरस्वती और भारत माता का स्वरूप उभरता है। गीत में भारत माता का किया गया वर्णन प्रेरणादायक और भावविभोर करने वाला है। इसके प्रत्येक शब्द में राष्ट्रप्रेम की भावना है। ‘वंदे मातरम्’ के गायन और श्रवण से राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि भारत को मिली स्वतंत्रता सहजता से प्राप्त नहीं हुई है। स्वतंत्रता के लिए अनेक क्रांतिकारियों और देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया तथा बलिदान दिया। इसलिए बड़े त्याग और बलिदान से प्राप्त स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए सक्षम और राष्ट्रप्रेमी युवा पीढ़ी का निर्माण करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रप्रेरक गीतों के माध्यम से विद्यार्थियों में देश के प्रति गौरव और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक अमेय सप्रे ने किया। प्रतियोगिता के आयोजन की भूमिका डॉ. शीतल गोडबोले ने स्पष्ट की। संचालन सायली गोडबोले ने किया, जबकि स्मिता देशपांडे ने आभार व्यक्त किया।
प्रतियोगिता के विजेता
कक्षा 1 से 4 तक:प्रथम: आद्यक्रांतिकारक वासुदेव बलवंत फड़के विद्यालय, पनवेल
द्वितीय: बालशिक्षण मराठी विद्यालय, डेक्कन
तृतीय: नवीन मराठी स्कूल
प्रोत्साहन पुरस्कार: बालशिक्षण मंदिर, मयूर कॉलोनी
कक्षा 5 से 7 तक:प्रथम: अभिनव इंग्लिश मीडियम स्कूल
द्वितीय: आर. एम. शाह विद्यालय
तृतीय: एन. ई. एम. एस.
प्रोत्साहन पुरस्कार: परांजपे विद्यालय, माधव गोलवलकर गुरुजी विद्यालय एवं अभिरुचि गुरुकुल



